नवजात के लिए दर्द रहित बनाम दर्दनाक (पारंपरिक) टीकाकरण: अभिभावक के लिए जरूरी गाइड लाइन
- by ["Dr. Rekha Mehta"]

क्या आप भी अपने बच्चे को लगने वाले टीके के बारे में चिंतित हैं? बच्चों को कौन सा टीका लगाए दर्द रहित या दर्द वाला (परंपरागत)? यह ब्लॉग आपको दोनों टीकों के बारे में सामान्य जानकारी देगा।
किसी बीमारी के विरुद्ध प्रतिरोधात्मक क्षमता(इम्यूनिटी) विकसित करने के लिए जो दवा खिलाई, पिलाई, इंजेक्शन या किसी अन्य रूप में दी जाती है उस प्रक्रिया को टीकाकरण कहते है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए यह बहुत आवश्यक है। टीकाकरण के बिना पोलियो, काली खांसी, मीजल्स, टिटनेस आदि कई बीमारियां खतरनाक रूप ले सकती है। दुनिया में सभी बच्चों के लिए टीकाकरण जरूरी है।
दर्द रहित टीका
दर्द रहित टीके का सामान्यतया यह मतलब समझा जाता है कि इससे किसी तरह का दर्द नहीं होगा, किसी भी तरह के टीके से थोड़ा दर्द तो होगा ही ,लेकिन परंपरागत दर्द वाले टीके की तुलना में कम दर्द, कम साइड इफैक्ट्स होंगे। इंजेक्शन से दिए जाने वाले टीके में थोड़ा दर्द तो होता ही है लेकिन कुछ दूसरे तरीके भी है जिसके जरिए बिना किसी दर्द के टीके दिए जा सकते है-
- मुंह या नाक से दिए जाने वाले टीके - पोलियो की दवा मुंह से दिया जाने वाला सबसे आम टीका है।
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त्वचा के जरिए दिए जाने वाले टीके -
- माइक्रोनीडल पैच - इसमें छोटा सा चिपकाने वाला पेच होता है जो त्वचा के ऊपरी सतह में जाकर वैक्सीन छोड़ता है।
- नैनो पैच वैक्सीन- इसमें माइक्रोनीडल की तुलना में बाहर के भाग की उठी हुई सतह पर बेहद छोटे-छोटे पेच होते हैं।
- जेट इंजेक्टर्स - तेज हवा के दबाव से दवा शरीर के अंदर जाती है।
- पल्मोनरी वैक्सीन - इसमें जेट पाउडर नेबुलाइजर या ड्राई पाउडर इनहेलर का इस्तेमाल कर छोटे-छोटे कण बनाए जाते है।
इनमें से कुछ तरीकों का अभी इस्तेमाल हो रहा है व कुछ पर लगातार रिसर्च चल रही है ताकि टीकाकरण में कम से कम दर्द हो।
डीटीएपी(DTaP) को दर्द रहित टीके का नाम दिया जाता है। "ए" का अर्थ है अकोशिकीय टीका। अकोशिकीय टीके में संपूर्ण कोशिकाएं नहीं होती है बल्कि इसमें विशिष्ट रोगजनक (जैसे बैक्टीरिया या वायरस) के शुद्ध घटक या अंश होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करते हैं। डीटीएपी डिप्थीरिया, टेटनेस काली खांसी के लिए दर्द रहित टीका है। दर्द रहित टीका बच्चों के लिए और अभिभावकों के लिए आरामदायक अनुभव है।
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दर्द रहित टीके के प्रभाव
- कम दर्द
- टीके वाली जगह पर कम सूजन व कम लालिमा
- बुखार आने की कम संभावना
- बच्चों में बेचैनी व चिड़चिड़ेपन में कमी
दर्दनाक (पारंपरिक) टीका
पारंपरिक टीकों का उपयोग सफलतापूर्वक पूरे विश्व में कई सालों से किया जा रहा है, लेकिन यह टीके दर्द रहित टीकों की तुलना में ज्यादा दर्द पैदा करते है। पारंपरिक रूप से लगने वाले दर्दनाक टीकों में डीटीडब्ल्यूपी (DTwP) सबसे ज्यादा दर्दनाक माना जाता है। डब्ल्यू का अर्थ है संपूर्ण कोशिका टीका, जिसे होल-सेल वैक्सीन भी कहा जाता है। यह पूरे(आमतौर पर निष्क्रिय) सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया) का उपयोग करके बनाया जाता है।
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दर्दनाक टीके के प्रभाव
- ज्यादा दर्द
- टीके वाली जगह पर ज्यादा सूजन व लालिमा
- बुखार
- बच्चों में अधिक बेचैनी व चिड़चिड़ापन
- उल्टी होना
दर्द रहित व दर्दनाक (परंपरागत) टीके में अंतर
दर्द रहित टीके में साइड इफेक्ट्स कम होते हैं जबकि दर्दनाक टीके के साइड इफैक्ट्स ज्यादा होते हैं। भारत में दर्द रहित टीके सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं है जबकि दर्दनाक (परंपरागत) टीके सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत सभी सरकारी अस्पतालों में निर्धारित दिनों पर नि:शुल्क उपलब्ध है। दर्द रहित टीके निजी अस्पतालों में उपलब्ध होने से उनकी लागत अधिक है अतः ज्यादातर शहरों में ही इसका इस्तेमाल हो रहा है। सरकारी योजनाओं में सम्मिलित होने के कारण गांव व दूरस्थ क्षेत्रों में अधिकांशतः दर्दनाक (परंपरागत) टीके ही लगवाए जाते हैं।
टीके चाहे दर्द रहित हो या दर्द वाले दोनों समान रूप से सुरक्षित व प्रभावी है। दोनों में से किसको चुनना है यह अभिभावक की पसंद व सुविधा पर निर्भर है। टीकाकरण का असली उद्देश्य है बच्चों को बीमारियों से बचाना इसलिए Zikku सभी अभिभावकों को प्रोत्साहित करता है की वे बाल रोग विशेषज्ञ से मिलकर समय पर अपने बच्चों को टीके लगवाएं वह दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।